June 19, 2026

गुप्ता बंधु को नहीं मिली जमानत… कोर्ट में एक घंटा चली दोनों पक्षों की जिरह… जज ने कहा- ‘अभी जेल में ही रहेंगे’

देहरादून के नामी बिल्डर सतेंद्र सिंह साहनी उर्फ बाबा साहनी की आत्महत्या के मामले में कोर्ट ने अजय कुमार गुप्ता और अनिल गुप्ता (गुप्ता बंधु) की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय साहिस्ता बानो की कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद जमानत अर्जी को निरस्त किए जाने का आदेश पारित किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने मृतक सतेंद्र साहनी से गुप्ता बंधु की लंबे समय से बातचीत न होने का हवाला दिया, जिससे कोर्ट सहमत नहीं हुई।

प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल
बिल्डर सतेंद्र सिंह साहनी की आत्महत्या के मामले में अजय कुमार गुप्ता और अनिल गुप्ता को राजपुर थाना पुलिस ने 24 मई को गिरफ्तार कर 25 मई को कोर्ट के समक्ष पेश करने के बाद जेल भेज दिया था। मामले में अजय और अनिल गुप्ता ने प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। जिस पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय साहिस्ता बानो की कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अतुल सिंह पुंडीर, अभिमांशु ध्यानी और एसके धर ने दलील पेश कर कहा कि बिल्डर सतेंद्र सिंह साहनी की आत्महत्या के मामले में रुपये हड़पने के एकमात्र उद्देश्य से यह मुकदमा दर्ज कराया गया है। मृतक ने अपने कथित सुसाइड नोट में स्वयं इस तथ्य का उल्लेख किया है कि साहनी आरोपितों के साथ लंबे समय से बात नहीं कर रहे थे। ऐसे में ब्लैकमेल और आत्महत्या के लिए उकसाने का सवाल नहीं उठता है। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए सहायक अभियोजन अधिकारी जावेद, योगेश सेठी और विवेक गुप्ता ने थाना राजपुर से प्राप्त आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि आरोपितों ने मृतक सतेंद्र सिंह साहनी को आत्महत्या के लिए उकसाया है।

पुलिस को दिया था डराने धमकाने का प्रार्थना पत्र भी
आत्महत्या से पहले साहनी ने आरोपितों के विरुद्ध 10 मई 2024 को डराने धमकाने का एक प्रार्थना पत्र भी पुलिस को दिया था। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपितों ने मृतक साहनी को परेशान करने की मंशा से उनके विरुद्ध एक शिकायती पत्र सहारनपुर पुलिस को दिया था। जिस कारण बिल्डर सतेंद्र सिंह साहनी ने आत्महत्या की है। इसलिए जमानती प्रार्थना पत्र अस्वीकार किए जाने योग्य है।

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि बचाव पक्ष ने सुसाइड नोट के आधार पर लंबे समय से बात न किए जाने को आधार बनाया है। न्यायालय का मत है कि प्रकरण विवेचना के अधीन है, जिसमें अभी साक्ष्य एकत्रित होने हैं और ऐसे में आरोपितों की ओर से किए गए कथनों पर साक्ष्य आने के बाद विचार किया जाएगा। तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपितों को इस स्तर पर जमानत दिए जाने का पर्याप्त आधार नहीं है।

 

Don't Miss

Copyright©2023,Purvanchal Mail, All rights reserved.( Design & Develop by Motion trail Creation, 9084358715) | Newsphere by AF themes.