May 14, 2026

Census: नियम तोड़ने पर जनगणना में लगे अधिकारी-कर्मचारी को होगी जेल, सहयोग न करने वाले लोगों पर लगेगा जुर्माना

1 min read

भारत के महापंजीयक की ओर से उत्तराखंड समेत देशभर के जनगणना निदेशालयों को जनगणना अधिनियम 1948 को लेकर सर्कुलर जारी किया गया है।इसी महीने शुरू होने जा रहे जनगणना के पहले चरण के बीच अगर किसी अधिकारी-कर्मचारी ने नियमों का उल्लंघन या लापरवाही की तो उसे तीन साल की जेल हो सकती है। वहीं, जनगणना में सहयोग न करने वाले आमजन पर भी कानूनी कार्रवाई के तहत जुर्माना लग सकता है।भारत के महापंजीयक की ओर से उत्तराखंड समेत देशभर के जनगणना निदेशालयों को जनगणना अधिनियम 1948 को लेकर सर्कुलर जारी किया गया है। इस अधिनियम के तहत न केवल आम जनता बल्कि जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। पहले चरण के तहत पोर्टल se.census.gov.in पर मकान स्वगणना 10 अप्रैल से, मकान सूचीकरण व गणना 25 अप्रैल से 24 मई तक होगी।अधिकारी-कर्मचारियों पर ये होगी कार्रवाई
जनगणना अधिनियम 1948 की धारा-11 के तहत यदि कोई जनगणना अधिकारी या जनगणना में सहायता के लिए कानूनी रूप से बाध्य व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करने से इनकार करता है या किसी अन्य को काम करने से रोकता है तो उसे तीन साल तक का कारावास और 1,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यदि कोई कर्मचारी अपने कर्तव्य के पालन में उचित तत्परता नहीं बरतता या उपेक्षा करता है तो वह दंड का भागी होगा। यदि कोई अधिकारी जानबूझकर अनुचित प्रश्न पूछता है, गलत डेटा तैयार करता है या सरकार की अनुमति के बिना जनगणना की जानकारी लीक करता है तो उसे कारावास और जुर्माना दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। जनगणना दस्तावेजों को छिपाने, नष्ट करने या उनके परिणामों में हेराफेरी करने वाले कर्मचारियों के लिए भी सख्त सजा का प्रावधान है।

Don't Miss

Copyright©2023,Purvanchal Mail, All rights reserved.( Design & Develop by Motion trail Creation, 9084358715) | Newsphere by AF themes.