May 14, 2026

अमेरिका-ईरान युद्धविराम, दूसरे दौर की वार्ता के लिए वेंस मंगलवार को इस्लामाबाद जा सकते हैं: रिपोर्ट

1 min read

इससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स ने दो ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद की यात्रा करने की योजना बना रहा है.

वॉशिंगटन: एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस सात हफ़्ते से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए मंगलवार को इस्लामाबाद की यात्रा कर सकते हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ‘द न्यूयॉर्क पोस्ट’ को बताया कि वेंस के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल पहले ही इस्लामाबाद के रास्ते में था, जबकि अन्य मीडिया संस्थान ने बताया कि उपराष्ट्रपति अभी भी वाशिंगटन में ही थे.

वेंस के इस्लामाबाद पहुंचने की उम्मीद है, ठीक उसी समय जब 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच तय हुआ दो हफ़्ते का सीजफायर (युद्धविराम) खत्म हो रहा है. यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाते हैं, तो वह ईरान में पुलों और पावर प्लांटों पर बमबारी करेंगे.

चूंकि वेंस के मंगलवार देर रात तक इस्लामाबाद पहुंचने की उम्मीद है, इसलिए ट्रंप ने प्रभावी रूप से सीजफ़ायर को एक दिन के लिए बढ़ाकर बुधवार तक कर दिया है. अमेरिकी समाचार संस्थान ‘एक्सियोस’ ने तीन अमेरिकी सूत्रों के हवाले से बताया, ‘उपराष्ट्रपति वेंस के मंगलवार सुबह तक इस्लामाबाद के लिए रवाना होने की उम्मीद है, ताकि युद्ध को खत्म करने के लिए एक संभावित समझौते पर ईरान के साथ बातचीत की जा सके.’

विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के वेंस के साथ शामिल होने की उम्मीद है. अमेरिका और ईरान के बीच नाज़ुक संघर्ष-विराम का रविवार को एक बार फिर इम्तिहान हुआ, जब एक अमेरिकी गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को पार करने की कोशिश कर रहे एक ईरानी मालवाहक जहाज पर गोलीबारी की और उसे जब्त कर लिया. इस घटना से ईरानी और भी ज़्यादा भड़क गए.

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के मध्यस्थों ने ईरानी टीम से बैठक में शामिल होने का आग्रह किया, लेकिन एक सूत्र के मुताबिक वे तब तक वहां से नहीं निकले जब तक उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता से मंज़ूरी नहीं मिल गई. सोमवार को इससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी दो ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद की यात्रा करने की योजना बना रहा है.

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद-बाघेर गालिबफ के इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने की उम्मीद है. रिपोर्ट में कहा गया कि ईरानी पक्ष बातचीत में देरी कर रहा था. ऐसा लगता है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से वार्ताकारों पर दबाव था कि वे एक सख़्त रुख अपनाएं. यानी, जब तक अमेरिका की नाकेबंदी खत्म नहीं हो जाती, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी.

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने फॉक्स न्यूज से कहा, ‘अमेरिका, ईरान के साथ एक अच्छे समझौते के इतना करीब पहले कभी नहीं था. ओबामा प्रशासन द्वारा किए गए समझौते के विपरीत इसका श्रेय राष्ट्रपति ट्रंप की बातचीत करने की काबिलियत को जाता है.’ उन्होंने सोमवार रात कहा, ‘जो कोई भी राष्ट्रपति ट्रंप की लंबी रणनीति (long game) को नहीं समझ पा रहा है, वह या तो बेवकूफ है या जान-बूझकर अनजान बना हुआ है.’

सीएनएन ने चर्चाओं से परिचित एक सूत्र के हवाले से बताया कि 11 अप्रैल को हुई बातचीत के पहले दौर में अमेरिकी वार्ताकारों ने प्रस्ताव दिया था कि ईरान 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन (enrichment) का काम रोक दे. एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ईरान ने इसके जवाब में पाँच साल तक रोक लगाने का प्रस्ताव दिया, जिसे अमेरिका ने खारिज कर दिया.

ट्रंप ने सोमवार को जोर देकर कहा कि उन्हें किसी समझौते पर पहुंचने का कोई दबाव महसूस नहीं हो रहा है. भले ही अमेरिकी जनता के बीच इस युद्ध की अलोकप्रियता बढ़ रही हो और गैस की कीमतें बढ़ने में इसकी भूमिका रही हो. उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘मुझ पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं है, हालाँकि यह सब कुछ काफी तेजी से होगा!’

Don't Miss

Copyright©2023,Purvanchal Mail, All rights reserved.( Design & Develop by Motion trail Creation, 9084358715) | Newsphere by AF themes.